
बलरामपुर विजय सिंह@ प्रधानमंत्री जन-मन योजना को देश के सबसे दूरस्थ और आदिवासी इलाकों के लिए विकास की नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह योजना विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर उनके जीवन स्तर में बदलाव लाएगी,
लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से सामने आई तस्वीरें इन दावों को कठघरे में खड़ा करती हैं।जहां से विकास की कहानी शुरू होती है हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड पहुंची। यह इलाका न सिर्फ भौगोलिक रूप से दुर्गम है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माना जाता है।
यहीं जिले के अंतिम छोर पर बसे पहाड़ी कोरवा जनजाति बाहुल्य गांव धनछुराकोना (छुराकोना) तक प्रधानमंत्री जन-मन योजना के तहत सड़क निर्माण किया जा रहा है।सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह सड़क ग्राम पंचायत धनेशपुर से आश्रित ग्राम छुराकोना तक बनाई जा रही है।
कुल लंबाई: लगभग 3 किलोमीटर कुल स्वीकृत लागत लगभग दो करोड की है,यह सड़क पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और आपात सेवाओं की सीधी कड़ी मानी जा रही थी कागजों की मजबूती, जमीन की कमजोरी
निर्माण स्थल पर जो हकीकत सामने आई, वह सरकारी दावों से बिल्कुल उलट थी,नई बनी सड़क की हालत देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि निर्माण में गुणवत्ता को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है,सड़क की ऊपरी डामर परत बेहद कमजोर पाई गई,झाड़ू लगाने मात्र से डामर और गिट्टी उखड़ने लगी,सड़क की सतह हाथ और पैरों के दबाव से ही टूटने लगी,इससे यह साफ हो गया कि सड़क न तो पहाड़ी इलाके की बारिश झेल पाएगी और न ही सामान्य यातायात का दबाव सह सकेगी,

कैमरे में कैद होती लापरवाही
जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो निर्माण एजेंसी और विभागीय निगरानी व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई,तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सड़क की परतें झाड़ू और हाथ से रगड़ने पर उखड़ रही हैं,किसी भी स्तर पर गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया दिखाई नहीं दीन तो ठेकेदार और न ही कोई वरिष्ठ विभागीय अधिकारी मौके पर मौजूद था,यह स्थिति दर्शाती है कि परियोजना केवल कागजों में ही मजबूत दिखाई जा रही है,
ग्रामीणों की बोले “पहली बारिश में बह जाएगी सड़क”स्थानीय ग्रामीणों और पहाड़ी कोरवा समुदाय के लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की,ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में घटिया और स्तरहीन रेत का इस्तेमाल किया गया 60 एमएम गिट्टी की जगह स्टोन डस्ट डाला गया सीमेंट और डामर की मात्रा में कटौती की गई पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्र के अनुसार निर्माण नहीं किया गया ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो पहली ही बारिश में सड़क पूरी तरह तबाह हो जाएगी,जीवनरेखा बननी थी, बोझ बनती नजर आई यह सड़क सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं थी, बल्कि पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए अस्पताल तक समय पर पहुंच

बच्चों की स्कूल जाने की सुविधा,आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता प्रशासन से सीधा संपर्क की जीवनरेखा थी,लेकिन घटिया निर्माण और संभावित भ्रष्टाचार ने इस उम्मीद को भी कमजोर कर दिया,निर्माण एजेंसी पर उठते रहे सवाल ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण का कार्य मैसर्स एल.सी. कटरे, मिशन रोड, राताखार, कोरबा द्वारा किया जा रहा है,आरोप है कि ठेकेदार स्वयं कभी स्थल पर नहीं आते बाहरी मजदूरों और मुंशी के भरोसे काम कराया जा रहा है स्थानीय आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा विभागीय जवाब बनाम जमीनी सच्चाई जब इस पूरे मामले में संबंधित विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से सवाल किया गया, तो उनका कहना था सड़क का कार्य अभी निर्माणाधीन है, ठेकेदार को गुणवत्ता के निर्देश दिए गए हैं, समय पर सभी कमियां दूर कर ली जाएंगी,
हालांकि, विभागीय बयान और कैमरे में कैद सच्चाई के बीच विरोधाभास साफ नजर आता है,प्रशासनिक जवाबदेही की जरूरत इस पूरे मामले में यह जरूरी हो गया है कि सड़क निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए निर्माण गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो भुगतान रोककर सुधारात्मक कार्य कराया जाए अब निगाहें प्रशासन पर प्रधानमंत्री जन-मन योजना का मकसद सबसे कमजोर तबके को मजबूत करना है,लेकिन यदि योजनाएं इसी तरह गुणवत्ता के अभाव में जमीनी स्तर पर फेल होती रहीं, तो विकास केवल घोषणाओं तक सीमित रह जाएगा,अब सवाल यह नहीं कि सड़क उखड़ी
सवाल यह है कि जिम्मेदार कौन है?
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