मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी किसानों की आय
कृषि विज्ञान केन्द्र बलरामपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

बलरामपुर@ कृषि आधारित आय को सुदृढ़ करने और किसानों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र, बलरामपुर में मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मे जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर ने सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में किसानों को परंपरागत एकल फसल पद्धति से बाहर निकलकर फसल विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य कृषि आधारित व्यवसाय जैसे मधुमक्खी पालन को अपनाकर किसान अपनी आय में बेहतर वृद्धि कर सकते हैं।
उप संचालक कृषि रामचंद्र भगत ने किसानों को फसल चक्र एवं विविधिकरण अपनाने की बात कही उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होगी और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।
कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. जी. के. निगम ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी कृषि आधारित व्यवसाय है, जो कम पूंजी और कम श्रम में शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बलरामपुर जिले की जलवायु और पर्यावरण इस व्यवसाय के लिए अत्यंत अनुकूल है, जिससे लघु एवं सीमांत किसानों के लिए यह आय का बेहतर विकल्प बन सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खी पालन के विशेषज्ञ प्राध्यापक डॉ. जी. पी. पैकरा ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन एवं गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन की जानकारी दी। उद्यानिकी महाविद्यालय रामानुजगंज के अधिष्ठाता श्री परमेश्वर गोरे ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है।
विशेषज्ञ डॉ. सचिन जायसवाल ने बताया कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन को अपनाते हैं, तो वे अपनी आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि कर सकते हैं। वैज्ञानिक श्री अनिल कुमार सोनपाकर ने तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में अनुभवी मधुमक्खी पालक कृषक श्री बैद्यनाथ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेत में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां स्थापित कर किसान आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत मे जिला पंचायत सीईओ के द्वारा प्रशिक्षण में भाग लेने वाले कृषकों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
दो दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों सहित लगभग 200 से 250 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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