
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल अधिकार,आधारित स्वरूप में किए जा रहे कथित जनविरोधी बदलावों को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है, वही आज जिला कांग्रेस कमेटी बलरामपुर-रामानुजगंज के अध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव के नेतृत्व में भारत के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए केंद्र सरकार से मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में यथावत बनाए रखने की मांग की है,
मनरेगा को कमजोर करने का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि मनरेगा केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए रोजगार का संवैधानिक अधिकार है,वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे बदलावों से इस कानून की को कमजोर किया जा रहा है और इसे अधिकार आधारित कानून से हटाकर सीमित प्रशासनिक योजना में बदला जा रहा है.वही 
कांग्रेस का आरोप है कि मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान में देरी, न्यूनतम मजदूरी निर्धारण में वास्तविक महंगाई की अनदेखी और पंचायतों व ग्राम सभाओं के अधिकारों में कटौती जैसे कदम ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका पर सीधा हमला हैं, वर्तमान सरकार इससे ग्रामीण बेरोजगारी, सामाजिक असुरक्षा और आर्थिक असमानता बढ़ने की आशंका है, ज्ञापन में यह मांग की गई है कि मनरेगा के तहत पंचायतों एवं ग्राम सभाओं को योजना का निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी के पूर्ण संवैधानिक अधिकार दिए जाएं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे,और मनरेगा को उसके मूल अधिकार पर आधारित स्वरूप में यथावत रखा जाए
,पंचायतों और ग्राम सभाओं को पूर्ण संवैधानिक अधिकार दिए जाएं,और वर्तमान महंगाई को ध्यान में रखते हुए मनरेगा के तहत न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन कीया जाए, ताकी और लोगों को हर तरह परिवार चलाने मे सहायता मिल सके कांग्रेस के नेताओं का कहना है की मनरेगा ने ग्रामीण भारत मे समाजिक न्याय समानता और गरिमा मजबूत किया जाए, यदी इसमे बदलाव किए गए वापस नही लिए गए तो पार्टी ग्रामीण जनता के हित में आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।
वही इस प्रदर्शन कार्यक्रम में हजारों की संख्या में कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे
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