
बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बादा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। इन तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि जिस भवन में छोटे-छोटे बच्चों को बैठाया जा रहा है, वह पूरी तरह से जर्जर अवस्था में है। हैरानी की बात यह है कि इस भवन को विभाग द्वारा पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद आंगनबाड़ी का संचालन यहीं किया जा रहा है।
तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं खतरा सामने आई तस्वीरों में भवन की दीवारों में गहरी दरारें, उखड़ा हुआ प्लास्टर और कमजोर छत साफ नजर आ रही है। कई जगहों से सीमेंट झड़ चुका है और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने की स्थिति बन जाती है। ये तस्वीरें किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका को उजागर करती हैं।
बच्चों की सुरक्षा से सीधा समझौता स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि इन तस्वीरों को देखकर साफ समझा जा सकता है कि आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा
है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताई मजबूरी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता फूलवती ने बताया कि जर्जर भवन की स्थिति को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया है। कुछ समय के लिए केंद्र का संचालन प्राथमिक शाला भवन में किया गया था, लेकिन वहां बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण दिक्कतें आने लगीं। गांव में कोई अन्य किराए का भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण मजबूरी में इसी जर्जर भवन में आंगनबाड़ी चलानी पड़ रही है।
सुपरवाइजर ने माना भवन जर्जर घोषित
डीपाडीह कला क्षेत्र की आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मांगो बड़ा ने फोन पर बातचीत में स्वीकार किया कि संबंधित आंगनबाड़ी भवन को पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद संचालन हो रहा है, तो वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर जल्द प्रयास किया जाएगा।
तस्वीरों के बाद भी क्यों नहीं कार्रवाई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तस्वीरें साफ-साफ खतरे की ओर इशारा कर रही हैं, तो अब तक स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा?
ग्रामीणों की मांग ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्र को तत्काल किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, जर्जर भवन में संचालन जारी रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है और सामने आई तस्वीरों के बाद प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद और भी बढ़ गई है।
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