
बलरामपुर जिला मुख्यालय के आसपास के क्षेत्र में धड़ल्ले से शासकीय भूमि पर भूमाफियाओं के द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार मौन बैठा तमाशा देख रहे हैं तो वही एक ज्वलंत मुद्दा निकाल कर सामने आया है स्थगन आदेश को ठेंगा दिखाया और अपना मकान बना लिया है जिसका शिकायत कुछ दिन पूर्व ही बलरामपुर कलेक्टर कार्यालय में किया गया है लेकिन अभी तक इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है प्राप्त जानकारी के अनुसार बलरामपुर तहसील क्षेत्र में अब कानून नहीं दबंगई और प्रशासनिक संरक्षण चल रहा है ग्राम बड़कीमहरी में शासकीय भूमि पर कब्जा कर निर्माण करने वाले दबंग के विरुद्ध तहसीलदार बलरामपुर न्यायालय द्वारा स्पष्ट बेदखली आदेश पारित होने के बावजूद अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी किया इससे साफ है कि न्यायालय के आदेशों की यहां कोई कीमत नहीं बची है।
न्यायालय ने अवैध कब्जा सिद्ध पाए जाने पर कब्जाधारी को दोषी ठहराते हुए अर्थदंड लगाया और सात दिन में कब्जा हटाने का आदेश दिया, साथ ही बेदखली वारंट भी जारी किया गया। इसके बाद भी अवैध कब्जाधारी ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए मकान की ढलाई तक कर डाली।
इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रशासन पूरी तरह खामोश है। न बेदखली, न निर्माण रोका गया
क्या तहसील कार्यालय अवैध कब्जाधारी का संरक्षक बन चुका है?
क्या बलरामपुर में न्यायालय के आदेश सिर्फ कागज बनकर रह गए हैं
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों को इस तरह उलझन करें तो आम आदमी न्याय के लिए किस दरवाजे पर जाएगा? यह मामला अब केवल जमीन का नहीं, बल्कि जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों के कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं
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