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महुआ बीनकर जीवन, गंदा पानी पीकर गुजारा. झालबासा की मजबूरी आदिवासी बृजिया समाज की पीड़ा, पानी के लिए रोज की जद्दोजहद,

कागजों में विकास, जमीन पर प्यासा गांव,जिम्मेदार कौन? जल जीवन मिशन अधूरा क्यों? दो साल से इंतजार में झालबासा

बलरामपुर ब्यूरो विजय सिंह जिले के कुसमी विकासखंड साबाग ग्राम पंचायत का झालबासा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। यहां ज्यादातर आदिवासी बृजिया समाज के लोग रहते हैं, और जंगल में रोजमर्रा का काम एवं महुआ विन कर अपना जीवन यापन करते हैं जो आज भी स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत जरूरत के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विकास के दावों के बीच इस गांव की हकीकत बेहद चिंताजनक है।

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बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत आने वाला झालबासा गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। जबकि यह सभा ग्राम पंचायत का झलबासा गांव है और 175 वोटर्स है,करीब 200 से 250 की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश लोग आदिवासी बृजिया समाज से हैं, जो वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं।
गांव में आज तक न तो स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो पाई है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकी हैं। एक भी हैंडपंप नहीं होने के कारण ग्रामीणों को नदी-नालों का पानी पीना पड़ता है। हालात इतने खराब हैं कि लोग कपड़े से छानकर गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। गर्मी और बरसात में यही पानी और अधिक दूषित हो जाता है, जिससे बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है।
ग्रामीण बताते हैं कि वे नदी में “चुआं” बनाकर पानी निकालते हैं और उसी पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में करते हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास की वास्तविकता को भी उजागर करती है।

                 जल जीवन मिशन अधूरा

गांव में दो साल पहले जल जीवन मिशन के तहत कार्य शुरू किया गया था। बृजिया समाज के लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें स्वच्छ पानी मिलेगा, लेकिन योजना अधूरी छोड़ दी गई। आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, जिससे ग्रामीणों की उम्मीदें टूट चुकी हैं।
     

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शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव

गांव में शिक्षा की स्थिति भी बेहद दयनीय है। छोटे-छोटे बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है। वहीं, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा भी यहां उपलब्ध नहीं है। बच्चों के आधार कार्ड बनाने तक के लिए कोई शिविर नहीं लगाया गया।

            अधिकारियों की अनदेखी

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अपनी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं हुई। उनका आरोप है कि अधिकारी एक बार आए जरूर, लेकिन उसके बाद दोबारा गांव की सुध लेने कोई नहीं पहुंचा।
बरसात के दिनों में पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण हालात और भी खराब हो जाते हैं। बाढ़ जैसी स्थिति में ग्रामीण उसी गंदे पानी के साफ होने का इंतजार करते हैं और छानकर पीते हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना रहता है।

       झलबासा गांव  मे विकास कब पहुंचेगा?

आदिवासी बृजिया समाज के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। न पानी, न शिक्षा, न स्वास्थ्य ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस गांव तक विकास की किरण कब पहुंचेगी?ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक जीवन मिल सके।

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Vijay Singh

विजय सिंह, समीक्षा न्यूज़ के मुख्य लेखक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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