
बलरामपुर, कुसमी।हंसपुर गांव में 15 फरवरी की रात सिर्फ एक कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि एक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। गांव वालों का आरोप है कि अवैध माइनिंग की जांच के नाम पर पहुंचे कुसमी के एसडीएम करूण डहरिया और उनकी टीम की मौजूदगी से गांव में दहशत का माहौल बन गया। इसी दौरान कथित मारपीट में एक ग्रामीण की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए।
ग्रामीणों का कहना है कि रात करीब 8 से 9 बजे के बीच प्रशासनिक टीम गांव पहुंची। पहले पूछताछ हुई, फिर बहस और देखते ही देखते मामला हाथापाई तक पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, “उस रात गांव में अफरा-तफरी थी, लोग घरों से निकलने से भी डर रहे थे।”
मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका आरोप है कि “जांच के नाम पर ऐसी सख्ती क्यों, जिससे जान चली जाए?” परिजन इसे सीधी मारपीट का मामला बता रहे हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि टीम अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई करने गई थी और उनके साथ भी विवाद हुआ। फिलहाल पुलिस ने एसडीएम समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।
घटना के बाद सर्व आदिवासी समाज और स्थानीय लोग एकजुट हो गए। राजपुर–कुसमी मार्ग पर प्रदर्शन कर लोगों ने न्यायिक जांच, मृतक के परिजनों को मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि “जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।”
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है।
हंसपुर गांव में फिलहाल मातम और खामोशी है। एक घर का चिराग बुझ चुका है, दो लोग अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं और गांव के लोग पूछ रहे हैं—क्या जांच का तरीका इतना कठोर होना चाहिए था कि पूरा गांव खौफ में जीने लगे?
अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है। सच क्या है, यह जांच के बाद साफ होगा, लेकिन उस रात का खौफ और एक परिवार का दर्द लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा
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