
बलरामपुर@ शासन भले ही गरीबों के स्वास्थ्य के लिए योजनाओं की झड़ी लगा रहा हो और गांव-गांव तक एंबुलेंस जैसी सुविधाएं पहुंचाकर लोगों को समय पर इलाज कराने का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिम्मेदारों की लापरवाही अब खुलकर सामने आने लगी है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मंगलवार को विश्व क्षय दिवस के अवसर पर 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के दूसरे चरण का भव्य शुभारंभ बलरामपुर के ऑडिटोरियम हॉल में किया गया। कार्यक्रम में बड़े-बड़े दावे किए गए—गांव-गांव जाकर जांच, समय पर उपचार और टीबी मुक्त जिला बनाने की बात कही गई। वहीं निक्षय वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और ढोल पीटा गया।
लेकिन यह दिखावा ज्यादा देर टिक नहीं पाया। कार्यक्रम खत्म होते ही उसी एंबुलेंस का असली चेहरा सामने आ गया। जिस वाहन को मरीजों की सेवा और जीवन बचाने के लिए भेजा गया था, उसे कुछ ही घंटों में सामान ढोने की गाड़ी बना दिया गया। एंबुलेंस नहीं बल्कि कार्यक्रम के बैनर-पोस्टर और सामान लादकर सीएमएचओ कार्यालय पहुंचाया गया। लोगों ने बाकायदा इसका फोटो और वीडियो भी बनाया जब जिम्मेदार ही एंबुलेंस का ऐसा दुरुपयोग करेंगे, तो आम जनता को क्या संदेश जाएगा।यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी समझा जा सकता है की कैसे कुछ लापरवाह अधिकारी शासन की योजनाओं को मजाक बनाकर रख दे रहे हैं।
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