
बलरामपुर, कुसमी हंसपुर गांव में हुई मौत अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर सीधा सवाल बन गई है, 15 फरवरी की रात अवैध खनन की जांच के दौरान कुसमी के एसडीएम करुण डहरिया और उनकी टीम पर मारपीट के आरोप लगे, नतीजा एक ग्रामीण की मौत, दो घायल और पूरा गांव सहमा हुआ,जब एसडीएम अवैध बॉक्साइट खनन की कार्यवाही करने के लिए निकले हुए थे तो जो लोग एक प्रशासनिक की किसी भी विभाग से नहीं जुड़े हुए थे तो उन लोगों के साथ एसडीएम करूडण डहरिया किसकी आदेश के बाद ऊन लोगों को लेकर पहूचे कार्रवाई करने सूत्रों की माने तो यह जानकारी निकाल कर सामने आ रही है कि एक जिम्मेदार अधिकारी कभी भी कार्यवाही के लिए निकलते थे तो वहीं लोगों के साथ निकलते हैं जो की किसी तरह से प्रशासन की सुचि पर उन लोगों का नाम दर्ज नहीं था जब इतनी जानकारी होने के बावजूद भी एसडीएम पर किसी तरहा का कार्यशैली पर कोई जवाब देही नही समझा गया, बलरामपुर जिले मे कब से ग्रामीणों को प्रशास्नीक अमला मे सामील करने लगा जिला प्रशासन और जांच टिम बनाकर भेजा जा रहा लोगो को 
जिसकी वजह से आज यह बुजुर्ग की हत्या कर दिया जाता है एक गरीब परिवार में रहने वाले आदिवासी की
सबसे बड़ा सवाल आखिर जिम्मेदार कौन?क्या कार्रवाई के नाम पर हदें पार की गईं?क्या प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल कानून से ऊपर समझकर किया गया?
ग्रामीणों का आरोप है कि उस रात गांव में खौफ था, जांच कब जबर में बदल गई, किसी को समझ नहीं आया एक परिवार का सहारा छिन गया और अब वही परिवार इंसाफ की गुहार लगा रहा है,पुलिस ने एसडीएम समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है, और एसडीएम को निलंबित भी कर दिया गया है लेकिन सवाल सिर्फ गिरफ्तारी और निलंबित की नहीं है जवाबदेही का,अगर किसी अधिकारी पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो क्या सिर्फ जांच काफी है?
जिला प्रशासन पर भी उंगलियां उठ रही हैं, क्या अधिकारियों की कार्यशैली की मॉनिटरिंग होती है? क्या संवेदनशील क्षेत्रों में तैनाती से पहले आचरण और व्यवहार की समीक्षा की जाती है?
सर्व आदिवासी समाज और स्थानीय लोग सड़क पर उतरे ,मांग साफ है,निष्पक्ष जांच, कड़ी कार्रवाई, मुआवजा और परिवार को सरकारी नौकरी,राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है, विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है,हंसपुर की यह घटना एक चेतावनी है कानून लागू करने वालों पर भी कानून बराबर लागू होना चाहिए,अब देखना है कि जांच सच सामने लाएगी या फिर यह सवाल यूं ही हवा में तैरता रहेगा इस मौत का असली जिम्मेदार कौन?
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