तातापानी पर्यटन स्थल बना कचरे का ढेर, मेला खत्म होते ही सफाई व्यवस्था हुई गायब..

बलरामपुर_छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल तातापानी तपेश्वर धाम इन दिनों अपनी प्राकृतिक खूबसूरती नहीं, बल्कि गंदगी और कचरे के अंबार को लेकर चर्चा में है। गर्म पानी के कुंड और धार्मिक आस्था के कारण यहां सालभर हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन मेला समाप्त होने के बाद पर्यटन स्थल की हालत बेहद खराब हो गई है।
मकर संक्रांति मेला खत्म, पीछे रह गया कचरे का पहाड़
तातापानी में हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर तीन दिवसीय मेला आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी 14, 15 और 16 जनवरी को मेले का आयोजन हुआ, जिसका शुभारंभ प्रदेश के मुखिया द्वारा किया गया था।लेकिन मेला खत्म होते ही प्रशासन की व्यवस्थाएं गायब हो गईं। आज स्थिति यह है कि पूरे क्षेत्र में चारों तरफ कचरा फैला हुआ है, जिससे पर्यटन स्थल की छवि धूमिल हो रही है।
महिला सहायता समूह का आरोप सफाई के बदले नहीं मिलता भुगतान
जब स्थानीय महिला सहायता समूह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि सफाई कार्य के लिए उन्हें कोई भुगतान नहीं दिया जाता।महिलाओं का आरोप है कि प्रशासन दुकानदारों से स्क्वायर फीट के हिसाब से शुल्क तो वसूलता है, लेकिन सफाई व्यवस्था पर ध्यान नहीं देता।पंचायत का जवाब – बजट नहीं है, सफाई नहीं हो पाएगी तातापानी ग्राम पंचायत क्षेत्र में आता है। जब इस मामले में पंचायत सचिव और सरपंच से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि—
“हमारे पास बजट नहीं है, इसलिए सफाई नहीं करा पाएंगे।”
अब सवाल यह उठता है कि मेले के दौरान वसूली गई राशि आखिर कहां खर्च होती है?ग्रामीण परेशान, उड़ता कचरा घरों तक पहुंच रहा तातापानी के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह कचरा बड़ी समस्या बन चुका है। हवा चलने पर कचरा उड़कर घरों तक पहुंच रहा है और खाने-पीने की चीजों में गिर रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय ग्रामीण की प्रतिक्रियाललन कुशवाहा (स्थानीय निवासी) ने बताया
मेला खत्म हुए कई दिन हो गए लेकिन सफाई नहीं हुई। चारों तरफ गंदगी फैली है, बदबू आती है। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
तातापानी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर गंदगी का यह हाल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है और कब तातापानी को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाया जाएगा।
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