बलरामपुर में मनरेगा भ्रष्टाचार की पोल खुली, मजदूरों की जगह अमीरों के नाम पर निकाला जा रहा भुगतान!
जेसीबी से हो रहा काम, मजदूरों की फर्जी हाजिरी! भवरमाल पंचायत में मनरेगा योजना बनी भ्रष्टाचार का अड्डा

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से मनरेगा योजना में बड़े भ्रष्टाचार और सरकारी राशि की बंदरबांट का गंभीर मामला सामने आया है। जिले के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत भवरमाल में मनरेगा के तहत चल रहे निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता, फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। पंचायत के पंचों और ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंप दी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में मनरेगा योजना का लाभ गरीब मजदूरों तक पहुंचने के बजाय, कुछ प्रभावशाली लोगों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, पंचायत में सरपंच, रोजगार सहायक सचिव, पंचायत सचिव और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा आपसी साठगांठ कर मनरेगा कार्यों में बड़ा घोटाला किया जा रहा है।
एक ही परिवार के हाथों में पंचायत की कमान, पारदर्शिता पर सवाल
शिकायत में सबसे बड़ा आरोप यह है कि ग्राम पंचायत भवरमाल में सरपंच और रोजगार सहायक सचिव एक ही परिवार के सदस्य हैं, रोजगार सहायक सचिव सरपंच का पुत्र बताया जा रहा है। इससे पंचायत प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जब एक ही परिवार पंचायत की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर बैठा हो, तो सरकारी योजनाओं के संचालन में मनमानी होना तय है।
19.51 लाख-19.51 लाख के कार्यों में फर्जी मजदूरी का खेल
मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत भवरमाल में दो बड़े नहर निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है—दलको बांध नहर निर्माण कार्य(पंचायत भवन से बहेरा तक)टेडवापीपर से दुभानपारा कनहर नंदी तक नहर निर्माण कार्य इन दोनों कार्यों के लिए लगभग 19.51 लाख रुपये-19.51 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इन निर्माण कार्यों में वास्तविक मजदूरों के बजाय, ऐसे लोगों की फर्जी हाजरी लगाकर भुगतान निकाला जा रहा है जो मजदूरी करने आते ही नहीं।
फर्जी मस्टर रोल से निकाली जा रही सरकारी राशि
शिकायत में बताया गया है कि मनरेगा के ऑनलाइन मस्टर रोल में ऐसे व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं जो पहले से संपन्न हैं और जिनके पास लाखों-करोड़ों की चल-अचल संपत्ति मौजूद है।इतना ही नहीं, कुछ लोग अन्यत्र—नौकरी बैंक सेवा दुकान संचालन निजी व्यवसायमें संलग्न हैं, फिर भी उन्हें मनरेगा मजदूर बताकर भुगतान निकाला जा रहा है। इससे वास्तविक गरीब मजदूर रोजगार से वंचित हो रहे हैं।
ग्रामीणों द्वारा शिकायत में जिन नामों का उल्लेख किया गया है, उनमें प्रमुख हैं—उत्तम लाल गुप्ता एवं उनकी पत्नी अमृता गुप्ता श्रवण गुप्ता एवं उनकी पत्नी मानती गुप्ता सुनील सोनी एवं उनकी पत्नी राखी सोनी लालमोहन ठाकुर, अनिता ठाकुर कुमारी सरस्वती सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि इन नामों पर फर्जी उपस्थिति दिखाकर सरकारी राशि का भुगतान किया जा रहा है।
जेसीबी मशीन से कराया जा रहा मनरेगा कार्य, नियमों की खुलेआम अनदेखी मनरेगा का मूल उद्देश्य मजदूरों को रोजगार देना है, लेकिन पंचायत भवरमाल में नियमों के विपरीत मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि—
सी.सी. चेक डेम (दुधमनीया, पुराना छट घाट) का निर्माण जेसीबी मशीन से कराया जा रहा है, जबकि मजदूरों की फर्जी हाजरी भरकर भुगतान निकाला जा रहा है।इस कार्य का स्वीकृति क्रमांक—
3305016048/2025-26 (दिनांक 23 दिसंबर 2025) बताया गया है।15वें वित्त में भी अनियमितता, सामुदायिक शौचालय निर्माण पर सवाल मनरेगा के अलावा पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।ग्रामीणों के अनुसार—बहुआर तालाब के पास लगभग 3 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक शौचालय निर्माण कराया जा रहा है, जबकि उस स्थान पर—न घनी आबादी है न बाजार है न कोई शासकीय कार्यालय न सार्वजनिक कार्यक्रम फिर भी निर्माण दिखाकर 1.50 लाख रुपये की अग्रिम राशि निकाल ली गई।इस मामले में सचिव को निलंबित किया गया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच को संरक्षण देकर बचाने की कोशिश की जा रही है।ग्रामीणों की मांग—दोषियों पर हो कड़ी कानूनी कार्रवाई ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मांग की है कि—पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए दोषी सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक एवं अन्य कर्मचारियों पर FIR दर्ज हो फर्जी मस्टर रोल के माध्यम से निकाली गई राशि की रिकवरी हो मनरेगा योजना का लाभ वास्तविक गरीब मजदूरों तक पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी।अब देखना होगा प्रशासन क्या कदम उठाता है
फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या मनरेगा में हो रहे इस कथित भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाएगी या नहीं।
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