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लाखों का घोटाला उजागर, फिर भी चुप प्रशासन बलरामपुर में जवाबदेही पर संकट

जांच रिपोर्ट ठंडी, फाइलें गर्म: दवा घोटाले में 7 महीने से क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

बलरामपुर नगर पालिका का यह मामला सिर्फ “अनियमितता” नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जवाबदेही की विफलता का उदाहरण बनता जा रहा है और अब उंगलियां साफ तौर पर नगर पालिका की सीएमओ प्रणव राय की भूमिका पर उठने लगी हैं।
दवा घोटाले में ‘चुप्पी’ सबसे बड़ा सवाल महीने बीत जाने के बाद भी जब करोड़ों नहीं तो लाखों की गड़बड़ी सामने आ चुकी हो, जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी हो, जिम्मेदार अधिकारियों के नाम सामने आ चुके हों,फिर भी कार्रवाई शून्य रहे, तो सवाल सिर्फ सिस्टम पर नहीं, बल्कि सिस्टम चलाने वालों पर खड़े होते हैं।सीएमओ प्रणव राय पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि उनके कार्यकाल में इतनी बड़ी अनियमितताएं हुईं रिकॉर्ड तक सही तरीके से संधारित नहीं किए गए एक्सपायर दवाइयों और महंगे खरीद की अनदेखी की गई और सबसे अहम,जांच के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं की गई
क्या यह महज लापरवाही है… या फिर जानबूझकर आंखें मूंद लेने का मामला?

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दवा खरीद में खेल बलरामपुर नगर पालिका में लाखों की गड़बड़ी, कार्रवाई अब तक गायब

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एक्सपायर दवाएं, फर्जी रिकॉर्ड: बलरामपुर नगर पालिका में बड़ा खुलासा, कार्रवाई पर सवाल

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जनता की सेहत से खिलवाड़: बलरामपुर नगर पालिका में दवा घोटाला बेनकाब

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जांच ने खोली पोल, सिस्टम ने ओढ़ी चुप्पी: दवा घोटाले में बड़ा सवाल

कागज गायब, जवाब गायब’ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल जांच में जो तथ्य सामने आए, वे किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के लिए शर्मनाक हैं ₹3.20 लाख की एक्सपायर दवाएं बनाम ₹84 हजार का दावा MRP से अधिक दर पर खरीद स्टॉक रजिस्टर, मांग पत्र, नोटशीट तक गायब यह सब बिना शीर्ष स्तर की जानकारी के संभव नहीं माना जा सकता। ऐसे में सीएमओ  की भूमिका पर सवाल उठना लाजिमी है।जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़, और जिम्मेदार ‘मौन’सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह मामला सीधे जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा है।एक तरफ लोग इलाज के लिए सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं, वहीं दूसरी तरफ एक्सपायर और संदिग्ध दवाओं की खरीद यह सिर्फ वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ जोखिम है।
फिर भी न कोई निलंबन न वसूली न स्पष्ट कार्रवाई तो आखिर किसका संरक्षण है?
राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव या मिलीभगत? अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह पूरा मामला दबाने की कोशिश हो रही है?क्या जिम्मेदारों को बचाने के लिए कार्रवाई टाली जा रही है?यदि ऐसा है, तो यह केवल एक नगर पालिका का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है। जवाबदेही तय होगी या मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?नगर पालिका की सीएमओ  अब इस पूरे मामले के केंद्र में हैं।जांच रिपोर्ट सामने है, तथ्य स्पष्ट हैं अब जरूरत है ठोस और त्वरित कार्रवाई की।अगर अब भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरक्षण का खुला उदाहरण माना जाएगा।

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Vijay Singh

विजय सिंह, समीक्षा न्यूज़ के मुख्य लेखक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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