सतनामी समाज के हितों की सुरक्षा हेतु जरूरी कदम, अवैध धर्मांतरण और दोहरे लाभ पर लगेगा अंकुश; साय सरकार के फैसले से सामाजिक संतुलन को मिलेगा बल
धर्म स्वतंत्रता कानून पर भ्रम फैलाना बंद करें – दीनानाथ खूंटे

रायपुर छत्तीसगढ़:- धर्म स्वतंत्रता अधिनियम को लेकर प्रदेश में कुछ संगठनों द्वारा जिस प्रकार का भ्रम फैलाया जा रहा है, वह न केवल तथ्यहीन है बल्कि समाज में अनावश्यक भय और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास भी है।
इस संबंध में धर्म जागरण छत्तीसगढ़ के चर्चित चेहरा भाजपा के कद्दावर नेता सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला उपाध्यक्ष दीनानाथ खूंटे ने कहा कि यह अधिनियम किसी भी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य अवैध, प्रलोभन अथवा दबावपूर्वक किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा के विरुद्ध या किसी प्रकार के दबाव अथवा प्रलोभन में आकर धर्म परिवर्तन न करे।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने समाज में पारदर्शिता और विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
दीनानाथ खूंटे ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि “मैं स्वयं सतनामी समाज से आता हूं और ऐसे अनेक लोगों को जानता हूं जिन्होंने मन से मतांतरण किया है, लेकिन इसके बावजूद वे स्वयं को सतनामी जाति का बताकर विभिन्न शासकीय लाभ भी लेते हैं। इतना ही नहीं, कई बार ऐसे लोग हमारे समाज के अन्य लोगों को भी मतांतरित करने का प्रयास करते हैं, जिससे सामाजिक विघटन की स्थिति बनती है।”
उन्होंने आगे कहा कि “कई मामलों में रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से मानसिक दबाव एवं प्रताड़ना तक देखने को मिलती है, जिससे समाज के भीतर अनावश्यक तनाव और विभाजन पैदा होता है। अब तक सशक्त कानूनी प्रावधानों के अभाव में हमें अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा है।”
उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “यदि यह कानून शीघ्र लागू नहीं होता है तो हम जैसे लोगों को भी मतांतरित होने से कोई नहीं बचा पाएगा। आज मेरे अपने नाते-रिश्तों में अधिकांश लोग मतांतरित हो चुके हैं और कुछ मेरे सामाजिक मित्र भी इस दिशा में लगातार दबाव बनाते हैं। वे हमें हतोत्साहित करते हैं, यहां तक कि मेरे अपने भाई भी इसमें पीछे नहीं हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि “स्थिति इतनी चिंताजनक है कि कई बार शासन-प्रशासन भी उनके प्रभाव में आकर हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की स्थिति उत्पन्न कर देता है। सशक्त कानूनी व्यवस्था के अभाव में हम स्वयं को असहाय और मजबूर महसूस कर रहे हैं।”
दीनानाथ खूंटे ने कहा कि “यह कानून हम जैसे लोगों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा समाज को तोड़ने वाली शक्तियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा। वर्तमान में जो विरोध और आंदोलन दिखाई दे रहा है, उसमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो पहले ही मतांतरित हो चुके हैं और इस कानून के लागू होने से उनके दोहरे लाभ लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।”
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अपील करते हुए कहा कि “इस कानून को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश और समाज के व्यापक हित में है। साथ ही सत्य और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए भी यह आवश्यक कदम है।”
अंत में उन्होंने कहा कि समाज में शांति, सौहार्द और पारदर्शिता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और कानूनों को सही संदर्भ में समझकर ही अपनी राय बनानी चाहिए।
सतनामी समाज के हितों की सुरक्षा हेतु जरूरी कदम, अवैध धर्मांतरण और दोहरे लाभ पर लगेगा अंकुश; साय सरकार के फैसले से सामाजिक संतुलन को मिलेगा बल
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम को लेकर प्रदेश में कुछ संगठनों द्वारा जिस प्रकार का भ्रम फैलाया जा रहा है, वह न केवल तथ्यहीन है बल्कि समाज में अनावश्यक भय और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास भी है।
इस संबंध में धर्म जागरण छत्तीसगढ़ के चर्चित चेहरा भाजपा के कद्दावर नेता सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला उपाध्यक्ष दीनानाथ खूंटे ने कहा कि यह अधिनियम किसी भी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि इसका मूल उद्देश्य अवैध, प्रलोभन अथवा दबावपूर्वक किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा के विरुद्ध या किसी प्रकार के दबाव अथवा प्रलोभन में आकर धर्म परिवर्तन न करे।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने समाज में पारदर्शिता और विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
दीनानाथ खूंटे ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि “मैं स्वयं सतनामी समाज से आता हूं और ऐसे अनेक लोगों को जानता हूं जिन्होंने मन से मतांतरण किया है, लेकिन इसके बावजूद वे स्वयं को सतनामी जाति का बताकर विभिन्न शासकीय लाभ भी लेते हैं। इतना ही नहीं, कई बार ऐसे लोग हमारे समाज के अन्य लोगों को भी मतांतरित करने का प्रयास करते हैं, जिससे सामाजिक विघटन की स्थिति बनती है।”
उन्होंने आगे कहा कि “कई मामलों में रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से मानसिक दबाव एवं प्रताड़ना तक देखने को मिलती है, जिससे समाज के भीतर अनावश्यक तनाव और विभाजन पैदा होता है। अब तक सशक्त कानूनी प्रावधानों के अभाव में हमें अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा है।”
उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “यदि यह कानून शीघ्र लागू नहीं होता है तो हम जैसे लोगों को भी मतांतरित होने से कोई नहीं बचा पाएगा। आज मेरे अपने नाते-रिश्तों में अधिकांश लोग मतांतरित हो चुके हैं और कुछ मेरे सामाजिक मित्र भी इस दिशा में लगातार दबाव बनाते हैं। वे हमें हतोत्साहित करते हैं, यहां तक कि मेरे अपने भाई भी इसमें पीछे नहीं हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि “स्थिति इतनी चिंताजनक है कि कई बार शासन-प्रशासन भी उनके प्रभाव में आकर हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की स्थिति उत्पन्न कर देता है। सशक्त कानूनी व्यवस्था के अभाव में हम स्वयं को असहाय और मजबूर महसूस कर रहे हैं।”
दीनानाथ खूंटे ने कहा कि “यह कानून हम जैसे लोगों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा समाज को तोड़ने वाली शक्तियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा। वर्तमान में जो विरोध और आंदोलन दिखाई दे रहा है, उसमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो पहले ही मतांतरित हो चुके हैं और इस कानून के लागू होने से उनके दोहरे लाभ लेने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।”
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से अपील करते हुए कहा कि “इस कानून को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश और समाज के व्यापक हित में है। साथ ही सत्य और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए भी यह आवश्यक कदम है।”
अंत में उन्होंने कहा कि समाज में शांति, सौहार्द और पारदर्शिता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और कानूनों को सही संदर्भ में समझकर ही अपनी राय बनानी चाहिए।
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