मुख्यमंत्री के दौरे से पहले चमकी सड़कें, दौरा खत्म होते ही फिर मौत का रास्ता! बलरामपुर में विकास या सिर्फ दिखावा?
सुशासन तिहार में वीआईपी स्वागत के लिए रातों-रात भरे गए गड्ढे, अब आम जनता फिर उसी जर्जर सड़क पर जान जोखिम में डालने को मजबूर

बलरामपुर @छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के 3और 4 मई को बलरामपुर दौरे परथे और सुशासन तिहार कार्यक्रम को लेकर जिले में प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर था। मुख्यमंत्री के काफिले को कहीं सड़क पर गड्ढे नजर न आ जाएं, इसके लिए जिम्मेदार विभागों ने दिन-रात एक कर सड़क मरम्मत, रंग-रोगन और चकाचौंध व्यवस्था तैयार की।
मुख्यमंत्री के गुजरने वाले रास्तों पर आनन-फानन में गड्ढे भरे गए, सड़कें चमकाई गईं और ऐसा माहौल बनाया गया मानो जिले में विकास की गंगा बह रही हो। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह व्यवस्था सिर्फ वीआईपी दौरे तक ही सीमित थी?
जैसे ही मुख्यमंत्री का दौरा खत्म हुआ, वैसे ही असलियत फिर सड़कों पर दिखाई देने लगी। जिन रास्तों को कुछ दिन पहले चमकाया गया था, वहां फिर उखड़ी सड़कें, गड्ढे और बदहाल हालात नजर आने लगे। अब आम जनता उन्हीं “मौत के रास्तों” से गुजरने को मजबूर है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर बार मंत्री और बड़े अधिकारियों के दौरे से पहले ही सड़क मरम्मत का नाटक किया जाता है। करोड़ों रुपए खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन सड़कें कुछ दिन भी टिक नहीं पातीं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकारी राशि केवल दिखावे और बंदरबांट के लिए खर्च की जा रही है? स्थानीय
लोगों का कहना है कि सड़कें ऐसी बनाई जाती हैं कि कुछ ही दिनों में फिर खराब हो जाएं, ताकि दोबारा टेंडर निकले, फिर मरम्मत हो और सरकारी पैसों का खेल चलता रहे। इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभाग, अधिकारी और ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
•सुशासन के दावों के बीच बलरामपुर की सड़कें अब खुद सवाल पूछ रही हैं
•क्या विकास सिर्फ मुख्यमंत्री के काफिले तक सीमित है?
•क्या आम जनता की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?
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