
बलरामपुर@जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत विनायकपुर के आश्रम पारा में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले पहाड़ी कोरवा जनजाति की एक विशाल और प्रभावशाली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर शामिल हुए, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज के वरिष्ठजन और महिलाएं उपस्थित रहीं।
बैठक के दौरान समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई, जिसमें सबसे प्रमुख मुद्दा पुश्तैनी जमीन पर फर्जी तरीके से बनाए गए पट्टों का रहा। ग्रामीणों ने एकजुट होकर आरोप लगाया कि उनकी वर्षों पुरानी जमीन पर बाहरी लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, एक ही भूमि के लिए एक साथ 14 लोगों के नाम पट्टा जारी होना प्रशासनिक अनियमितता का बड़ा उदाहरण है।
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पौड़ी खुर्द रजुवाढोढी में पहाड़ी कोरवा परिवार पिछले 60-65 वर्षों से लगातार खेती करते आ रहे हैं। उनके पूर्वजों ने जंगल और झाड़ियों से भरी जमीन को साफ कर उसे उपजाऊ बनाया और वर्षों तक अरहर सहित कई फसलें उगाईं। इसके बावजूद वर्ष 1971-72 के बंदोबस्त के दौरान कथित तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत से यह जमीन बाहरी लोगों के नाम कर दी गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफियाओं ने न केवल अवैध तरीके से पट्टा बनवाया, बल्कि अपने परिवार के कई सदस्यों के नाम पर भी जमीन दर्ज करवा ली। इतना ही नहीं, मूल कब्जाधारियों को जमीन खाली करने की धमकियां भी दी जा रही हैं, जिससे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है।
पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने इस मामले में तहसील स्तर से लेकर राष्ट्रपति तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि पट्टा जारी करते समय न तो कोई सार्वजनिक सूचना (इश्तिहार) जारी की गई और न ही मौके पर जांच की गई, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
बैठक में मौजूद जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि समाज इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन की रणनीति भी बनाई जाएगी, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर भी उठा सवाल
बैठक में ग्रामीणों ने क्षेत्र में हो रही अवैध जंगल कटाई का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उनका कहना है कि वन क्षेत्रों में लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है और वहां टमाटर सहित अन्य फसलों की खेती शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह सब जमीन कब्जाने की मंशा से किया जा रहा है, लेकिन वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही फर्जी पट्टों को निरस्त कर उनकी पुश्तैनी जमीन वापस नहीं की गई और अवैध कटाई पर रोक नहीं लगी, तो वे मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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