Balrampurकलेक्टरछत्तीसगढ़

कृष्ण कुंज की बदहाल तस्वीर, देखभाल के अभाव में उजड़ता हरित सपना..

कलेक्टोरेट परिसर के पास बना था लोगों को सुकून देने का स्थल, अब बन चुका है उपेक्षा का शिकार..

बलरामपुर,आइए, एक बार नजर डालते हैं उस कृष्ण कुंज पर, जिसे कभी हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और लोगों को सुकून देने की सोच के साथ विकसित किया गया था। जिला मुख्यालय में स्थित इस स्थल पर विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे लगाए गए थे। उद्देश्य यह था कि कलेक्टर कार्यालय या अन्य शासकीय कार्यालयों में आने वाले आम नागरिक यहां कुछ पल सुकून के बिता सकें, वहीं अधिकारी और कर्मचारी भी अपने कार्यों की व्यस्तता के बीच पेड़ों की छांव में बैठकर मानसिक शांति और ताजगी महसूस कर सकें।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

लेकिन आज इस कृष्ण कुंज की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह अपनी पहचान खो चुका हो। कभी हरियाली से लहलहाने वाला यह परिसर अब उपेक्षा और अनदेखी का शिकार बन गया है। कई पौधे सूख चुके हैं, तो कई जगहों पर घास और झाड़ियां भी नजर नहीं आतीं। रखरखाव के अभाव में यह पूरा क्षेत्र बंजर भूमि जैसा दिखाई देने लगा है।

             सिंचाई व्यवस्था भी हुई गायब

 

स्थानीय लोगों के अनुसार पौधों की सिंचाई के लिए यहां पंप और अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं, ताकि गर्मी के मौसम में भी पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके। लेकिन अब स्थिति यह है कि सिंचाई के लिए लगाया गया पंप भी गायब बताया जा रहा है। नियमित देखभाल और पानी नहीं मिलने के कारण अधिकांश पौधे मुरझाने लगे हैं।

  आंगनबाड़ी केन्द्रों में तीन माह से नहीं मिला पोषण आहार के पैकेट, कैसे मिटेगा कुपोषण?

पर्यावरण संरक्षण की मंशा पर फिर रहा पानी

कृष्ण कुंज केवल एक उद्यान नहीं था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की एक महत्वपूर्ण पहल थी। लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए पौधों और विकसित किए गए परिसर की यह दुर्दशा कई सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते इसकी सुध नहीं ली गई तो आने वाले दिनों में यह हरित क्षेत्र पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

प्रशासन से निरीक्षण और पुनर्जीवन की मांग

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कृष्ण कुंज का पुनः निरीक्षण कराया जाए। सूख चुके पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जाएं, सिंचाई व्यवस्था को बहाल किया जाए तथा नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि इस हरित स्थल की खोई हुई पहचान वापस लौट सके।

कृष्ण कुंज सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जिले के लोगों की उस उम्मीद का प्रतीक है, जिसमें स्वच्छ वातावरण, हरियाली और प्रकृति के बीच कुछ सुकून भरे पल तलाशने की कल्पना जुड़ी हुई थी। आज वही उम्मीद उपेक्षा की धूल में दबती नजर आ रही है। प्रशासन यदि संवेदनशीलता के साथ इस ओर ध्यान दे तो यह स्थल फिर से लोगों के लिए आकर्षण और राहत का केंद्र बन सकता है।

 

 

 

Was this article helpful?
YesNo

Live Cricket Info

Vijay Singh

विजय सिंह, समीक्षा न्यूज़ के मुख्य लेखक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button