पेड़ की छांव बनी आंदोलन की चौपाल, आदिवासी अधिकारों पर गूंजा जनसंकल्प..
देवरीडांड में जुटे ग्रामीणों ने परिसीमन पर पुनर्विचार और आदिवासी धर्म कोड लागू करने की उठाई मांग...

बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने आदिवासी हितों और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर अब प्रदेशव्यापी जनजागरण और आंदोलन की राह पकड़ ली है, जिले के विकासखंड राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बासेन के देवरीडांड में आयोजित जनजागृति अभियान के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने परिसीमन प्रक्रिया पर रोक, आगामी जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की व्यवस्था तथा पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन चलाने की घोषणा की,
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, परंपरा, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विषयों की लगातार अनदेखी की जा रही है, उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिसीमन की प्रस्तावित प्रक्रिया, जनगणना में आदिवासी धर्म कोड की अनुपस्थिति और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आदिवासी समाज के भीतर गहरी चिंता और असंतोष व्याप्त है,
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य का गठन आदिवासी समाज की ऐतिहासिक मांगों, अधिकारों की रक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से हुआ था।,लेकिन आज ऐसी परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, जिससे आदिवासी समुदाय को यह आशंका सताने लगी है कि उनके राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, यदि परिसीमन प्रक्रिया बिना पर्याप्त अध्ययन और जनभावनाओं को ध्यान में रखे लागू की जाती है, तो आदिवासी बहुल क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है,
बसंत कुजूर ने कहा कि आदिवासी धर्म कोड की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है,आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट धार्मिक मान्यताएं, परंपराएं और प्रकृति आधारित जीवनशैली है, जिसे अलग पहचान मिलनी चाहिए,उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना में आदिवासी धर्म कोड का प्रावधान नहीं होने से आदिवासी समुदाय की धार्मिक पहचान सही रूप में दर्ज नहीं हो पाती, जिससे उनकी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं पर भी असर पड़ता है,
कार्यक्रम में वक्ताओं ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की सुरक्षा और वहां लागू संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी पालन की भी मांग की, उनका कहना था कि संविधान ने अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के संरक्षण और विकास के लिए विशेष व्यवस्थाएं प्रदान की हैं, लेकिन कई मामलों में इन प्रावधानों का अपेक्षित लाभ समाज को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों की संवैधानिक सुरक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है,
जिला अध्यक्ष ने जिले के सभी विकासखंडों कुसमी, शंकरगढ़, राजपुर, बलरामपुर, रामचंद्रपुर, वाड्रफनगर तथा सामाजिक ब्लॉक चांदो के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों से एकजुट होकर जनजागरण अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया, उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समाज अपने अधिकारों की रक्षा और मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन करेगा,
उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है तथा अपनी मांगों को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से शासन-प्रशासन तक पहुंचाएगा,यदि समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी,
कार्यक्रम में महिला प्रकोष्ठ की जिला संरक्षक महिमा कुजूर,बबन बखला वर्तमान सरपंच बासेन सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, ग्रामीणजन, युवा, महिलाएं और विभिन्न गांवों से आए प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जनजागृति अभियान के माध्यम से समाज ने आदिवासी अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा एकजुटता का संदेश देने का संकल्प लिया,आदिवासी समाज के इस ऐलान के बाद जिले में परिसीमन, आदिवासी धर्म कोड और पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है,
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