
बलरामपुर @आगामी जनगणना 2026 को लेकर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में आदिवासी समाज के बीच एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, जिला बलरामपुर द्वारा समाज के सभी अध्यक्षों, सचिवों, पदाधिकारियों और बुद्धिजीवियों को पत्र जारी कर जनगणना में ‘आदिवासी धर्म’ को अलग से दर्ज कराने का आह्वान किया गया है।
समाज का मानना है कि यह जनगणना आदिवासी समुदाय के अस्तित्व, सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। लंबे समय से आदिवासी समाज अपनी परंपराओं, प्रकृति-पूजक जीवनशैली और सांस्कृतिक विशिष्टता के आधार पर पृथक धर्म कोड की मांग करता रहा है।
गांव-गांव जागरूकता पर जोर
पत्र में सभी सामाजिक पदाधिकारियों से अपील की गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर लोगों को जागरूक करें। विशेष रूप से जनगणना फॉर्म के धर्म कॉलम में किसी अन्य धर्म के बजाय स्पष्ट रूप से ‘आदिवासी धर्म’ दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया जाए।
साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि गणना कर्मी स्वयं से कोई अन्य धर्म दर्ज करने का प्रयास करें, तो समाज के लोग इसका विरोध करते हुए अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग करें।
युवाओं को बनाया जाएगा स्वयंसेवक
इस अभियान को सफल बनाने के लिए पढ़े-लिखे युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में तैयार करने की योजना बनाई गई है। ये युवा जनगणना के दौरान बुजुर्गों और कम शिक्षित लोगों की सहायता करेंगे, ताकि सही जानकारी दर्ज हो सके।
पहचान और अधिकारों का सवाल
समाज ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान ही उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा का आधार है। यदि इस बार जनगणना में सही धर्म और संख्या दर्ज नहीं हो पाई, तो भविष्य में पहचान और अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
समाज को पूरा भरोसा
समाज ने सभी वर्गों से सहयोग की अपेक्षा जताते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि बलरामपुर जिले के सभी आदिवासी समुदाय इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे और अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे।
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