
बलरामपुर। जिले के ग्राम सरनाडीह में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक मार्ग पर बनी पुलिया को मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया है। इससे न केवल आसपास के कई गांवों की जल निकासी प्रभावित हो रही है, बल्कि ग्रामीणों के आवागमन में भी भारी परेशानी उत्पन्न हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे शासन-प्रशासन से मजबूत और स्थायी पुल-पुलिया निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, ताकि आवागमन और जल निकासी व्यवस्था सुचारू रूप से बनी रहे। लेकिन विडंबना यह है कि जहां एक ओर सरकार ग्रामीण सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ दबंग तत्व पहले से निर्मित सार्वजनिक पुलिया को नुकसान पहुंचाकर ग्रामीणों की परेशानी बढ़ाने में लगे हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार सरनाडीह, टांगरमहुरी सहित आसपास के चार से पांच गांवों का वर्षा जल इसी नाले के माध्यम से बहकर चनान नदी में समाहित होता है। ग्रामीणों की सुविधा और जल निकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगभग 15-20 वर्ष पूर्व इस मार्ग पर पांच से छह बड़ी पुलियाओं का निर्माण कराया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि दहेजवार निवासी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता उर्फ मुनावा द्वारा उक्त पुलिया में मिट्टी डलवाकर जल प्रवाह को रोक दिया गया है। इससे नाले का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया है और बरसात के दौरान जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते अवरोध नहीं हटाया गया तो खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया बंद होने से स्कूली बच्चों, किसानों और आम लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसका उपयोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग करते हैं।
मामले को लेकर ग्रामीणों ने तहसीलदार बलरामपुर को लिखित शिकायत सौंपते हुए स्थल निरीक्षण कराने, पुलिया से मिट्टी हटवाने तथा दोषी व्यक्ति के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत पत्र में कहा गया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सार्वजनिक मार्ग को बाधित करना गंभीर विषय है, जिस पर प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो बरसात के मौसम में हालात और गंभीर हो सकते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों की समस्या का समाधान कब तक हो पाता है।
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