गोचर भूमि पर कथित अवैध पट्टे से भड़का विवाद, ग्रामीणों ने कब्जे का किया विरोध; निष्पक्ष जांच की मांग

बलरामपुर। बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत कोटसरी में गोचर भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। वर्षों से गांव के मवेशियों के चरने और बांधने के लिए उपयोग में लाई जा रही भूमि पर कथित रूप से दूसरे गांव के व्यक्ति के नाम पट्टा जारी होने के आरोप के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए चेतावनी दी है कि किसी भी कीमत पर गोचर भूमि पर कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित फर्जी पट्टे को निरस्त करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित भूमि का उपयोग उनके पूर्वजों के समय से गोचर भूमि के रूप में होता आया है। गांव के किसान और पशुपालक अपने गाय, बैल, बकरी सहित अन्य मवेशियों को इसी भूमि पर चराते और बांधते रहे हैं। ऐसे में यदि इस सार्वजनिक उपयोग की जमीन का किसी निजी व्यक्ति के नाम पट्टा बना दिया गया है, तो यह पूरे गांव के हितों के साथ अन्याय है।ग्रामीणों के अनुसार हाल ही में दूसरे गांव के एक व्यक्ति द्वारा उक्त भूमि पर कब्जे की कोशिश की गई। विरोध करने पर उसने पहले से पट्टा बने होने का दावा किया। इस दावे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह पट्टा वास्तव में जारी किया गया है, तो इसकी वैधानिकता और प्रक्रिया की गहन जांच होनी चाहिए।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि गोचर भूमि केवल खाली पड़ी जमीन नहीं होती, बल्कि यह पूरे गांव की सामुदायिक संपत्ति है, जिसका उपयोग पशुपालन से जुड़े परिवार वर्षों से करते आ रहे हैं। यदि इस प्रकार सार्वजनिक भूमि पर निजी कब्जे की अनुमति दी जाती है तो भविष्य में पशुपालकों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व अभिलेखों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित पट्टे को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे तथा गोचर भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा नहीं होने देंगे।वहीं इस पूरे मामले में बलरामपुर एसडीएम अभिषेक गुप्ता ने कहा कि यदि शासकीय या गोचर भूमि पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा किया गया है तो मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि फर्जी पट्टा बनाए जाने की शिकायत प्राप्त हुई है तो उसकी भी विधिसम्मत जांच होगी। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है, लेकिन ग्रामीणों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और प्रशासन गोचर भूमि को लेकर उठे इस विवाद में क्या ठोस कार्रवाई करता है। पूरे क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीण प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
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