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आदिवासी छात्रावासों में अव्यवस्था की इंतहा! निरीक्षण के बाद उठे बड़े सवाल, अब कार्रवाई की मांग

कोगवार और बलंगी छात्रावास में निरीक्षण के दौरान मिलीं गंभीर अनियमितताएं, रजिस्टर गायब, एक्सपायरी तेल, खराब नल और बच्चों की सुविधाओं पर सवाल; कमीशन के आरोपों से विभाग कटघरे में।

बलरामपुर@ जिले के आदिवासी छात्रावासों में व्याप्त कथित अनियमितताओं और बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर के नेतृत्व में जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित एवं जिला के अंतिम सिमा में कोगवार एवं बलंगी छात्रावासों का निरीक्षण किया गया निरीक्षण के दौरान सामने आईं अव्यवस्थाओं ने समाज प्रतिनिधियों को चौंका दिया। उनका कहना है कि बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है, जिससे आदिवासी विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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समाज की टीम के अनुसार कोगवार छात्रावास में निरीक्षण के दौरान केवल 15 बच्चे ही मौजूद मिले, जबकि उपस्थिति पंजी में करीब 50 विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज थी। और वही बच्चों के लिए खाने के चावल में बड़े-बड़े कंकड ,बच्चों को मिलने वाली लगाने वाला तेल एक्सपायरी पाया गया एवं समाजीक प्रतिनिधियों के खाने का तेल दिखने बोला तो वह भी उपलब्ध नहीं था
स्वास्थ्य परीक्षण रजिस्टर एवं स्टॉक रजिस्टर तक नहीं संधारण नहीं किया गया था समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि छात्रावास अधीक्षिका के द्वारा आवश्यक दस्तावेज छात्रावास में उपलब्ध नहीं कराया गया जब उनसे इस मामले में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पानी में भीग गया है इसीलिए मैं अपने घर में ले जाकर रखी हू अचंभित कर देने वाली बात यह है कि जब अधीक्षिका छात्रावास में रहती है तो रजिस्टर घर में कैसे छात्रावास संचालन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दूसरी ओर बलंगी छात्रावास में भी कई खामियां मिलने का दावा किया गया है। वहां भी व्यवस्थाओं को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं मिली
एवं छात्रावास कैंपस के अंदर का नल कई महीनो से खराब पड़ा है वहीं बच्चों के सुरक्षा की दृष्टि से हॉस्टल के बाउंड्री के ऊपर सेफ्टी तार लगाना जरूरी है
भ्रमण के दौरान जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में लंबे समय से प्रभारी व्यवस्था के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर छात्रावासों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, वे बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
बसंत कुजूर ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी जाएगी तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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मंथली कमीशन
के आरोप से बढ़ी हलचल

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब सूत्रों के हवाले से कथित मंथली कमीशन की चर्चा सामने आई। सूत्रों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि जिले के कुछ छात्रावासों से हर महीने 10 हजार से 20 हजार रुपये तक कथित रूप से कमीशन के रूप में भेजे जाने की चर्चा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
इन दावों के सामने आने के बाद जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि आदिवासी विद्यार्थियों के अधिकारों और उनके विकास के लिए मिलने वाले सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
अब लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि यदि कथित रूप से इस प्रकार की कोई व्यवस्था संचालित हो रही है तो इसकी जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को क्यों नहीं थी, और यदि थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आश्रम छात्रावास अधीक्षक बनने के लिए लगती है बोली

बलरामपुर रामानुजगंज जिले के अधिकांश आश्रम एवं छात्रावास में नियम विरुद्ध अधीक्षक बनाए गए हैं विश्वासत्रो सूत्रों ने बताया कि बिना चढ़ावा के कोई आश्रम छात्रावास अधीक्षक नहीं बन सकता है ऐसे में समझा जा सकता है कि आश्रम छात्रावास व्यवस्था सुधारने के लिए बना रहे हैं कि मोटी रकम कमाने के लिए।

गरीब आदिवासी बच्चों के हक पर डाका

आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारी इस प्रकार के बेपरवाह हो गए हैं कि गरीब आदिवासी बच्चों के हक पर डाका डालकर अपनी अवैध कमाई कर रहे हैं लंबे समय से यहां पर सिंडिकेट अवैध कमाई का चल रहा है।और इस विभाग में केवल प्रभारी प्रभारी का खेल चल रहा है

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Vijay Singh

विजय सिंह, समीक्षा न्यूज़ के मुख्य लेखक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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