बलरामपुर में उपेक्षा का शिकार हुआ काका लरंगसाय चौक, लाखों की लागत से बना स्थल अंधेरे में डूबा
रंग-बिरंगी लाइटें बंद, सूख रही हरियाली; जिम्मेदारों की अनदेखी पर उठे सवाल

बलरामपुर@मुख्यालय नगरपालिका मे स्थित काका लरंगसाय चौक इन दिनों बदहाल स्थिति का सामना कर रहा है। कभी रंग-बिरंगी रोशनी और हरियाली से आकर्षण का केंद्र बना यह चौक अब अंधेरे और अव्यवस्था में तब्दील होता नजर आ रहा है। सरगुजा संभाग में अपनी अलग पहचान रखने वाले वीर पुरुष काका लरंगसाय की स्मृति में बनाए गए इस चौक की दुर्दशा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है।
लगभग 12.50 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस चौक का उद्घाटन प्रदेश के कृषि मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक द्वारा बड़े ही तामझाम और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया था। उद्घाटन के समय चौक को आकर्षक लाइटों, सजावटी संरचनाओं और हरियाली से सुसज्जित किया गया था, ताकि शहर की सुंदरता में चार चांद लग सके। लेकिन कुछ ही दिनों बाद यहां की रंग-बिरंगी लाइटें बंद हो गईं और पूरा चौक अंधेरे में डूब गया।
स्थिति यह है कि चौक में लगाए गए पौधे भी देखरेख और पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। हरियाली बनाए रखने के लिए लगाए गए पौधे बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। चौक की साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी जिन पर है, उनकी लापरवाही अब साफ दिखाई देने लगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के चौक-चौराहों का निर्माण केवल सौंदर्यीकरण और महापुरुषों के सम्मान के उद्देश्य से किया जाता है, लेकिन बलरामपुर नगर पालिका क्षेत्र में इसका उल्टा देखने को मिल रहा है। जिस चौक को शहर की पहचान बनना था, वह अब उपेक्षा का प्रतीक बन गया है। रात होते ही चौक में अंधेरा पसरा रहता है, जिससे काका लरंगसाय की प्रतिमा भी जर्जर और उपेक्षित दिखाई देती है।
हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से होकर नगर पालिका के अधिकारी, विभिन्न विभागों के कर्मचारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि प्रतिदिन अपने कार्यालयों तक पहुंचते हैं। बावजूद इसके अब तक किसी ने इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी चौक की देखरेख क्यों नहीं हो पा रही है।
नगरवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और देखभाल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में चौक पूरी तरह बदहाल हो जाएगा और यहां लगी हरियाली भी खत्म हो जाएगी। अब देखना होगा कि खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन और नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कितनी गंभीरता दिखाते हैं, या फिर यह चौक यूं ही अंधेरे और बदहाली में डूबा रहेगा।
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