रेल लाइन का रूट बदलने के विरोध में जनता एकजुट, कहा, अधिकारों की अनदेखी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं…
पुराने सर्वे के अनुसार ही रेल लाइन निर्माण कराने की मांग रूट बदलने से क्षेत्र के विकास पर पड़ेगा प्रतिकूल असर...

बलरामपुर/ बरवाडीह,चिरमिरी,अंबिकापुर रेल परियोजना के प्रस्तावित रूट में बदलाव की आशंका को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। बुधवार को राजकीय माध्यमिक विद्यालय, बरवाडीह परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में बरवाडीह, महेशतरा, पचरीडीह सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए थे । बैठक में सर्वसम्मति से स्पष्ट किया गया कि वर्षों से प्रस्तावित रेल मार्ग में किसी भी प्रकार का बदलाव क्षेत्र के विकास के साथ अन्याय होगा और जनता इसका पुरजोर विरोध करेगी।
बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बरवाडीह,चिरमिरी,अंबिकापुर रेल परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास की आधारशिला है। यदि परियोजना का रूट बदला जाता है तो बरवाडीह और महेशतरा सहित आसपास के गांव विकास की मुख्यधारा से कट जाएंगे। इससे रोजगार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
65 एकड़ रेलवे भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप
बैठक में ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व में प्रस्तावित रेल मार्ग के लिए रेलवे विभाग द्वारा लगभग 65 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी, जो वर्तमान में सरकारी रिकॉर्ड में रेलवे की भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप लगाया गया कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने इस भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है और उसी कब्जे को बचाने के उद्देश्य से रेल परियोजना का रूट बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस प्रकार के प्रयास सफल होते हैं तो यह आम जनता के अधिकारों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन और रेलवे विभाग को ज्ञापन सौंपकर स्थिति से अवगत कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
पुराने सर्वे के आधार पर निर्माण कराने की मांग

बैठक में मौजूद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि रेल परियोजना के लिए पहले ही विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। ऐसे में अब नया रूट तय करना क्षेत्र की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि पूर्व में स्वीकृत और सर्वेक्षित रेल मार्ग के अनुसार ही परियोजना का निर्माण कराया जाए ताकि क्षेत्र का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।
वक्ताओं ने कहा कि रेल लाइन बनने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। इसलिए किसी भी कीमत पर परियोजना को मूल स्वरूप में ही लागू किया जाना चाहिए
न्याय नही होगा तो जन आंदोलन की भी चेतावनी 
बैठक में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि यदि प्रस्तावित रेल मार्ग में बदलाव किया गया तो क्षेत्रवासी व्यापक जन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और विकास की है। जनता अपने अधिकारों की अनदेखी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी।
बैठक के अंत में संघर्ष समिति के गठन और आगामी रणनीति पर भी चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए गांव-गांव अभियान चलाया जाएगा तथा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाई जाएगी।
बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे और सभी ने एकजुट होकर पूर्व प्रस्तावित रेल मार्ग को यथावत रखने की मांग का समर्थन किया।
एक तरफ विकास तो क्षेत्रीय प्रभावित लोगो के लिए विनाश कि चिंता
सबसे बडी चिंता का विषय अब लोगो को सताने लग है की अग नया रेलवे की रूट तय किया जाता है. तो ना जाने कितने गांव के लोग बेघर हो जाऐंगे कितने लोग रोड पर आ जाएंगे अब एक तरफ बिकास की बात तो एक तरफ बिनाश कि रास्ते दिखाई देने लगा है लोगो के आंखों मे और अब ईस लडाई को लडने के लिए जन आंदोलन करने कि भी निर्णय ले रहे है क्षेत्रीय जनाता….
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