
बलरामपुर@ छत्तीसगढ़ में कृषि आदान (खाद, बीज और कीटनाशक) व्यापारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्यभर के करीब 5 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले छत्तीसगढ़ एग्री इनपुट डीलर्स एसोसिएशन ने सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को अनुरोध पत्र भेजा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आगामी खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद और आंदोलन किया जाएगा।10 साल से लंबित हैं 12 सूत्रीय मांगें एसोसिएशन का कहना है कि उनकी 12 सूत्रीय मांगें पिछले एक दशक से केंद्र और राज्य सरकारों के पास लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
प्रमुख मांगें क्या हैं?व्यापारियों ने कई अहम मुद्दे उठाए हैं, जिनमें उर्वरक कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाले खाद के साथ अन्य उत्पादों की जबरन लिंकिंग पर रोक खाद की डिलीवरी सीधे डीलर के गोदाम तक सुनिश्चित करना (रेल-हेड से उठाव में अतिरिक्त खर्च खत्म हो)बढ़ती महंगाई के बीच डीलर मार्जिन कम से कम 8% किया जाए
ग्रामीण रिटेलर्स के लिए पोर्टल की अनिवार्यता खत्म कर इसे वैकल्पिक बनाया जाए अवैध बीजों की बिक्री पर सख्त रोक सीलबंद पैकिंग में गुणवत्ता खराब मिलने पर विक्रेता को दोषी नहीं, गवाह माना जाए कंपनियों के लिए एक्सपायर्ड और पुराने स्टॉक की वापसी अनिवार्य हो लाइसेंस और नियमों में बदलाव की मांग इसके अलावा एसोसिएशन ने नए बीज अधिनियम और कीटनाशक विधेयक 2025 में संशोधन की भी मांग की है।व्यापारियों का कहना है कि रिटेल डीलर्स को “प्रथम पक्ष” बनाने के प्रावधान को शिथिल किया जाए झूठी शिकायतों पर कार्रवाई से पहले जिला स्तर पर जांच कमेटी बने
लाइसेंस निलंबन के मामलों में 21 दिन में स्वतः बहाली का प्रावधान हो हर साल प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता खत्म हो दोहरी लाइसेंस व्यवस्था समाप्त की जाए आंदोलन की चेतावनी
एसोसिएशन ने सरकार को एक महीने का समय देते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन आंदोलन और बंद किया जाएगा। व्यापारियों का कहना है कि इससे कृषि आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी और किसानों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ेगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।
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