
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। बरसात के दौरान ग्रामीणों को आवागमन में होने वाली परेशानी दूर करने के लिए सड़क पर मुरुमीकरण कराया जाना था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर केवल 2 से 4 ट्रैक्टर मुरुम ही डाला गया, जबकि रिकॉर्ड में लगभग 800 ट्रैक्टर मुरुम दर्शाकर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी राशि निकालने की कोशिश की गई।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय मीडिया में खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई। खबर का असर यह हुआ कि प्रशासन हरकत में आया और मामले की जांच के लिए अधिकारियों की टीम गांव पहुंची। जांच के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी शिकायतें खुलकर रखीं।
जमीन पर नहीं मिला मुरुम, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश
जांच के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई। उनका कहना था कि जहां सैकड़ों ट्रैक्टर मुरुम डालने का दावा किया गया है, वहां धरातल पर मुरुम का नामोनिशान तक नहीं है। सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है और बरसात में लोगों को आज भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी दस्तावेजों में भारी मात्रा में मुरुम दिखाकर फर्जी बिल तैयार किया गया और सरकारी राशि के दुरुपयोग का प्रयास किया गया।
जांच अधिकारी के सामने सरपंच-सचिव और ग्रामीणों में तीखी बहस
मौके पर जांच के दौरान माहौल उस समय गर्मा गया जब ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव और पंचायत प्रतिनिधियों से जवाब मांगा। जांच अधिकारी के सामने ही दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीण लगातार कार्रवाई की मांग करते रहे, जबकि पंचायत पक्ष अपनी सफाई देता रहा।ग्रामीणों ने सरपंच पुत्र काबिलेश सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए और उनके खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और विकास कार्य केवल कागजों में पूरे किए जा रहे हैं।
बंद कमरे में ग्रामसभा करने का आरोप
ग्रामीणों ने जांच अधिकारी के सामने पंचायत सचिव पर आरोप लगाया कि ग्रामसभा और आमसभा की बैठकें नियमों के विपरीत बंद कमरे में की जाती हैं। वार्ड पंचों और वार्ड प्रतिनिधियों को बैठक की जानकारी तक नहीं दी जाती और न ही उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।ग्रामीणों का कहना था कि यदि ग्रामसभा की बैठकें पारदर्शी तरीके से होतीं तो इस प्रकार के कथित फर्जीवाड़े सामने नहीं आते।

जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले ने जनपद पंचायत की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय-समय पर विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाता, तो कथित फर्जी बिल बनाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की नौबत ही नहीं आती।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर होने वाले निर्माण कार्यों और भुगतान की प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रामीणों की मांग भी देंखे
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, फर्जी बिल तैयार करने और सरकारी राशि के दुरुपयोग के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जाए। साथ ही पंचायत के सभी विकास कार्यों का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन भी कराया जाए।
फिलहाल जांच टीम ने ग्रामीणों के बयान दर्ज किए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क मुरुमीकरण कार्य में वास्तव में कितनी अनियमितता हुई और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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