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कोरवा समाज की आवाज बने बसंत कुजूर:बसकेपी में अधूरी सड़क को लेकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग किए ग्रामीण

ग्रामीणों ने अपनी समस्या लेकर छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर से भी गुहार लगाई है और प्रशासन से हस्तक्षेप कर सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने की मांग की है..

बलरामपुर | प्रदेश में विशेष पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक है प्रधानमंत्री जनमन योजना, जिसका उद्देश्य दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाली विशेष पिछड़ी जनजातियों को पक्की सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।सरकारी दावों के अनुसार, इस योजना के तहत ऐसे इलाकों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां आज़ादी के दशकों बाद भी विकास नहीं पहुंच पाया है। लेकिन बलरामपुर जिले से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।एक साल से अधुरे में लटका सड़क निर्माण कार्य

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बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बसकेपी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सड़क निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई थी। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनके गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी और वर्षों पुरानी समस्याओं से राहत मिलेगी।ग्रामीणों और ग्राम पंचायत बसकेपी के सरपंच ने सड़क निर्माण को जल्द शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने अपनी समस्या लेकर छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर से भी गुहार लगाई है और प्रशासन से हस्तक्षेप कर सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराने की मांग की है।अब सवाल यह है कि क्या जनजातीय विकास की योजनाएं ऐसे ही व्यक्तियों की दादागिरी की भेंट चढ़ती रहेंगी? या फिर प्रशासन इस मामले में ठोस कार्रवाई कर कोरवा जनजाति के लोगों को उनका हक दिलाएगा.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब योजना स्वीकृत है और कार्य शुरू हो चुका था, तो फिर एक व्यक्ति के विरोध से सरकारी काम कैसे रुक गया?क्या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करे और जनहित में निर्णय ले?

प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना यदि इस तरह दबंगई और लापरवाही की भेंट चढ़ती रही, तो सरकार के जनजातीय विकास के दावे केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगे।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाता है, या फिर ग्राम पंचायत बसकेपी के कोरवा जनजाति के लोग यूं ही पक्की सड़क के इंतजार में सालों तक परेशान होते रहेंगे।

सड़क निर्माण कार्य करीब एक वर्ष पहले शुरू किया गया, लेकिन शुरुआती कुछ काम के बाद ही निर्माण पूरी तरह ठप पड़ गया। आज स्थिति यह है कि सड़क का नामोनिशान तक नजर नहीं आता और जगह-जगह अधूरा कार्य ग्रामीणों की परेशानी को और बढ़ा रहा है।निजी भूमि का हवाला देकर निर्माण रोके जाने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही बसंत गुप्ता नामक व्यक्ति ने निजी भूमि का हवाला देकर सड़क निर्माण कार्य को जबरन रुकवा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से सार्वजनिक रास्ते के रूप में उपयोग में रही है, इसके बावजूद दबाव बनाकर निर्माण कार्य रुकवाया गया।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार जानकारी देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे दबंग व्यक्ति के हौसले और बढ़ गए।कोरवा जनजाति पर पड़ रहा सीधा असर.इस पूरे मामले का सबसे ज्यादा असर विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समाज पर पड़ रहा है, जो इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में निवास करता है। आज भी ग्रामीणों को कीचड़ भरे, फिसलन वाले और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बीमार मरीजों को चारपाई या बाइक के सहारे अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है। वहीं स्कूली बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
गांव के विकास पर लगा ब्रेक ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव तक एंबुलेंस, बिजली विभाग की गाड़ियां और अन्य जरूरी सेवाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं। सड़क बन जाने से गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, बिजली आपूर्ति में सुधार और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की उम्मीद थी, लेकिन एक व्यक्ति की मनमानी ने पूरे गांव के विकास पर ब्रेक लगा दिया है।

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सरपंच और ग्रामीणों ने लगाई गुहार ग्राम पंचायत बसकेपी के सरपंच सहित ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कार्य को जल्द शुरू कराने की मांग की है।प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना यदि इस तरह दबंगई और लापरवाही की भेंट चढ़ती रही, तो सरकार के जनजातीय विकास के दावे केवल कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगे।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाता है, या फिर ग्राम पंचायत बसकेपी के कोरवा जनजाति के लोग यूं ही पक्की सड़क के इंतजार में सालों तक परेशान होते रहेंगे।

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Vijay Singh

विजय सिंह, समीक्षा न्यूज़ के मुख्य लेखक हैं। एवं वर्षों से निष्पक्ष, सत्य और जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित एक अनुभवी व जिम्मेदार पत्रकार के रूप में कार्यरत हूँ।

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