
बलरामपुर सरकार जहां हर घर तक सुरक्षित बिजली पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं जिला मुख्यालय बलरामपुर के नगर पालिका वार्ड क्रमांक-8 केनपारा में यह दावा पूरी तरह खोखला नजर आ रहा है यहां चार से पाच परिवार पिछले लगभग पांच से छः वर्षों से बिजली विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। घरों में बिजली का मीटर और वैध कनेक्शन होने के बावजूद आज तक बिजली के खंभे नहीं लगाए गए हैं। मजबूरी में लोग बांस की बल्लियों के सहारे लगभग 200 मीटर दूर से बिजली के तार खींचकर अपने घरों तक बिजली पहुंचा रहे हैं।
स्थिति इतनी गंभीर है कि खुले और लटकते बिजली के तार हर समय किसी बड़े हादसे को न्योता देते दिखाई देते हैं। पिछले वर्ष करंट की चपेट में आने से एक बकरी की मौत भी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद विभाग की नींद नहीं टूटी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग ने कनेक्शन तो दे दिया, लेकिन यह नहीं सोचा कि बिना खंभे के बिजली घरों तक सुरक्षित कैसे पहुंचेगी। मजबूरी में लोगों ने अपने खर्च पर बांस की बल्लियां खड़ी कर तार लगाए हैं, जो बरसात और तेज आंधी के दौरान कभी भी टूटकर सड़क पर गिर सकते हैं। यह रास्ता कई गलियों को जोड़ता है, जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट कार्यालय में भी शिकायत की गई थी, लेकिन अब तक न तो बिजली के खंभे लगाए गए और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। विडंबना यह है कि उपभोक्ता हर महीने नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक सुरक्षित बिजली सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन भारी वाहन गुजरते समय तारों की चपेट में आ गया या बारिश के दौरान तार टूटकर नीचे गिर गए, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।
इधर, पूरे बलरामपुर नगर में लगातार हो रही बिजली की आंख-मिचौली से भी लोग परेशान हैं। बार-बार बिजली कटौती से व्यापारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि समाचार प्रकाशित होने के बाद बिजली विभाग हरकत में आता है या फिर वार्ड क्रमांक-8 के लोगों को इसी तरह बांस के सहारे अपनी जिंदगी और बिजली दोनों का जोखिम उठाना पड़ेगा।
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