आदिवासी पर अत्याचार करना बंद करो अन्यथा होगा उग्र आंदोलन_ श्री कुजूर
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद भी खुद को सुरक्षित नहीं आदिवासी समाज ..

बलरामपुर@जिले में इन दिनों अवैध कब्जों का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। ताजा मामला ग्राम पंचायत पस्ता एवं ग्राम बासेन से सामने आया है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग एन एच 343 के किनारे शासकीय जमिनो पर कथित रूप से धड़ल्ले से कब्जा कर मकान निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी राज्यों से आए लोग यहां निवास कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक इस गंभीर मामले से अनजान बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार एनएच-343 किनारे इन दिनों तेजी से अवैध कब्जों का खेल चल रहा है। आरोप है कि स्टांप पेपर पर एग्रीमेंट कर जमीनों की खरीद-बिक्री भी खुलेआम की जा रही है। वहीं बासेन से लगे सियासरई क्षेत्र में शासकीय भूमि पर पहले कुछ आदिवासी परिवार झोपड़ी बनाकर निवास कर रहे थे, जिन्हें वन विभाग द्वारा हटाया गया था। इस संबंध में तहसील कार्यालय राजपुर में प्रकरण भी दर्ज हुआ था।
ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी परिवारों को हटाए जाने के बाद उसी जमीन पर झारखंड से आए कुछ दबंग लोगों ने कब्जा कर लिया। जब स्थानीय आदिवासी परिवारों ने इसका विरोध किया तो उन्हें किसी प्रकार का न्याय नहीं मिला। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि थाना पस्ता में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उल्टा उन्हीं पर अपराध कायम कर जेल भेज दिया गया।
आदिवासी परिवारों ने प्रशासन पर बाहरी लोगों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्थानीय निवासियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि बाहरी लोग खुलेआम शासकीय भूमि पर कब्जा कर रहे हैं।
मामले से नाराज हुए समाज जिलाध्यक्ष कुजुर
आदिवासी परिवारों ने छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर को ज्ञापन सौंपकर सामाजिक हस्तक्षेप एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की है। इस पर श्री कुजूर ने आश्वासन दिया कि वे मामले से बलरामपुर कलेक्टर को अवगत कराएंगे तथा जल्द से जल्द उचित कार्रवाई कराने का प्रयास करेंगे।
बसंत कुजुर ने उग्र आंदोलन की दिया चेतावनी
सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर ने कहा कि इस तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं।
आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन बचाने वाला हमारा आदिवासी समाज है, लेकिन जिले में आदिवासी परिवार खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने वन विभाग एवं राजस्व विभाग से गरीब परिवारों के साथ अन्याय करने और बाहरी लोगों को संरक्षण देना बंद करने की मांग की।
मीडिया से बातचीत में बसंत कुजूर ने कहा कि कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी केवल उन्हीं लोगों की बातें सुनते हैं, जो लेन-देन करने में सक्षम होते हैं।
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