फर्जी निवास प्रमाण पत्र रैकेट का बड़ा खुलासा छत्तीसगढ़ कोटे में भर्ती कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 4 आरोपी गिरफ्तार..
बलरामपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दूसरे राज्यों के युवकों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए दिलाया जा रहा था छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र

बलरामपुर@छत्तीसगढ़ में फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का बलरामपुर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य लाखों रुपये लेकर दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कर छत्तीसगढ़ का निवास प्रमाण पत्र बनवाते थे, ताकि वे राज्य कोटे का लाभ उठाकर केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरी हासिल कर सकें। 
पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ हुई सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। मामले ने न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि संगठित तरीके से सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर राष्ट्रीय स्तर की भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जा रहा था।
तहसीलदार की शिकायत से खुला पूरा मामला
मामले की शुरुआत तब हुई जब बलरामपुर तहसीलदार ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि सीआरपीएफ की 204 कोबरा बटालियन में पदस्थ एक जवान ने दूसरे व्यक्ति के शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों में हेरफेर कर अपने नाम से छत्तीसगढ़ का स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवा लिया था।
प्राथमिक जांच में दस्तावेजों की कूटरचना और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से फर्जी आवेदन की पुष्टि होने पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान राजस्थान निवासी आरोपी सुमित को गिरफ्तार किया गया, जिसने कथित रूप से छत्तीसगढ़ निवासी होने का फर्जी दावा कर केंद्रीय बल में भर्ती का लाभ प्राप्त किया था।
जांच बढ़ी तो सामने आया पूरा नेटवर्क
पुलिस की गहन जांच में यह मामला केवल एक फर्जी प्रमाण पत्र तक सीमित नहीं रहा। विवेचना के दौरान मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के निवासी विवेक सिंह तोमर और उसके सहयोगी आकाश शर्मा की भूमिका सामने आई। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार कर गैर-निवासियों को छत्तीसगढ़ का निवासी दर्शाने का काम करते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने नाम, पता, आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक अभिलेखों में बदलाव कर नए दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन कर स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करवाए जाते थे।
डोंगरगढ़ से संचालित हो रहा था तकनीकी नेटवर्क
मामले की आगे की जांच में राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ क्षेत्र से जुड़े एक तकनीकी सहयोगी की भूमिका सामने आई। पुलिस ने ओमप्रकाश चंद्रवंशी को गिरफ्तार किया, जिसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त कंप्यूटर सिस्टम भी जब्त किया गया है।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर सिटीजन आईडी बनाकर दस्तावेज डाउनलोड करता था और उनमें एडिटिंग कर नए नाम जोड़कर आवेदन प्रस्तुत करता था। इसके एवज में प्रति व्यक्ति हजारों रुपये लिए जाते थे। वहीं मुख्य आरोपी विवेक सिंह तोमर पर प्रति अभ्यर्थी तीन से चार लाख रुपये तक वसूलने का आरोप है।
केंद्रीय बलों की भर्ती में हो रहा था छत्तीसगढ़ कोटे का दुरुपयोग
पुलिस जांच में सामने आया है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भर्ती में छत्तीसगढ़ राज्य का कटऑफ कई बार अन्य राज्यों की तुलना में कम रहता है। इसी का फायदा उठाने के लिए दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से छत्तीसगढ़ का निवासी दर्शाया जा रहा था।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कई गैर-निवासी अभ्यर्थी सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी सहित अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती हुए हैं या भर्ती होने का प्रयास कर चुके हैं।
20 से 25 संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच
पुलिस के अनुसार अब तक की जांच में डोंगरगढ़ तहसील सहित अन्य स्थानों से लगभग 20 से 25 संदिग्ध स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी मिली है। इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर केंद्रीय सुरक्षा बलों में भर्ती प्राप्त करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है।
बलरामपुर पुलिस संबंधित केंद्रीय इकाइयों से पत्राचार कर रही है ताकि ऐसे मामलों में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सके। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
पुलिस की सतर्कता से बची भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता
इस पूरे मामले में बलरामपुर पुलिस की तत्परता और तकनीकी जांच महत्वपूर्ण साबित हुई है। यदि समय रहते इस नेटवर्क का खुलासा नहीं होता तो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में बाहरी अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों में प्रवेश कर सकते थे। पुलिस की कार्रवाई ने न केवल एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और राज्य के वास्तविक युवाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। डिजिटल साक्ष्यों, ऑनलाइन आवेदन रिकॉर्ड और जब्त कंप्यूटर सिस्टम की जांच की जा रही है। संभावना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लाभार्थियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
यह कार्रवाई संकेत देती है कि सरकारी दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर लाभ लेने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है और ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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